विधि दिवस पर विशेष
हमारी न्याय प्रणाली व वर्तमान
में त्वरित न्याय की आवश्यकता
वर्तमान समय में ज्यों-ज्यों शिक्षा का प्रचार-प्रसार हुआ हैं, त्यों-त्यों हमारे समाज में राजनैतिक एवं सामाजिक चेतना के साथ-साथ विधिक चेतना का भी विकास हुआ हैं। आज मानव जीवन का प्रत्येक पहलू विधि एवं काननू से संबंध रखने लगा हैं, वर्तमान समय में नागरिक अपने राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं शैक्षिक आदि अधिकारों का उपयोग व उपभोग मुख्यतः करना चाहता हैं। हमारी विधि भी इन अधिकारों को उपचार प्रदान करती हैं, लेकिन उपचार हमें समय पर मिलना बडी कठिन व दुर्लभ हो गया हैं, विलम्ब से प्राप्त हुआ न्याय न्याय नहीं अन्याय हैं। यदि न्याय उचित समय पर नहीं मिलता हैं तो उस न्याय व काननू का कोई औचित्य नहीं रह जाता हैं एवं ऐसे कानून व न्याय से व्यक्ति व्यथित एवम् कुंठित हो जाता हैं और न्याय और कानून से विमुख लोने लगा हैं। प्रत्येक देश की न्याय व्यवस्था अपने देश के विकास व प्रगति को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से आवश्यक प्रभावित करती हैं।
आज हमारे देश में आवश्यकता हैं विधि एवं न्याय प्रक्रिया में संशोधन कर न्यायिक प्रक्रिया को MORE
में त्वरित न्याय की आवश्यकता
वर्तमान समय में ज्यों-ज्यों शिक्षा का प्रचार-प्रसार हुआ हैं, त्यों-त्यों हमारे समाज में राजनैतिक एवं सामाजिक चेतना के साथ-साथ विधिक चेतना का भी विकास हुआ हैं। आज मानव जीवन का प्रत्येक पहलू विधि एवं काननू से संबंध रखने लगा हैं, वर्तमान समय में नागरिक अपने राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं शैक्षिक आदि अधिकारों का उपयोग व उपभोग मुख्यतः करना चाहता हैं। हमारी विधि भी इन अधिकारों को उपचार प्रदान करती हैं, लेकिन उपचार हमें समय पर मिलना बडी कठिन व दुर्लभ हो गया हैं, विलम्ब से प्राप्त हुआ न्याय न्याय नहीं अन्याय हैं। यदि न्याय उचित समय पर नहीं मिलता हैं तो उस न्याय व काननू का कोई औचित्य नहीं रह जाता हैं एवं ऐसे कानून व न्याय से व्यक्ति व्यथित एवम् कुंठित हो जाता हैं और न्याय और कानून से विमुख लोने लगा हैं। प्रत्येक देश की न्याय व्यवस्था अपने देश के विकास व प्रगति को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से आवश्यक प्रभावित करती हैं।
आज हमारे देश में आवश्यकता हैं विधि एवं न्याय प्रक्रिया में संशोधन कर न्यायिक प्रक्रिया को MORE








